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Friday, 8 January 2021

माउंट आबू – आश्चर्य से भरा एक पर्वत (Mount Abu)

 


माउंट आबू राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित एक प्रसिद्द हिल स्टेशन है। यह अपनी प्राकृतिक सुंदरता, आरामदायक जलवायु, हरी भरी पहाड़ियों, निर्मल झीलों, वास्तुशिल्पीय दृष्टि से सुंदर मंदिरों और अनेक धार्मिक स्थानों के लिए प्रसिद्द है। यह स्थान जैनियों के प्रसिद्द तीर्थ स्थानों में से एक है। यह हिल स्टेशन अरावली पर्वत की सबसे ऊँची चोटी पर 1220 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है।
 
 माउंट आबू अपने शानदार इतिहास, प्राचीन पुरातात्विक स्थलों और अद्भुत मौसम के कारण राजस्थान के पर्यटन के आकर्षणों में सबसे बड़ा है। अधिकांशतः गर्मियों में और मानसून के दौरान यहाँ प्रतिवर्ष हजारों पर्यटक और भक्त आते हैं। पिछले दशकों में यह हिल स्टेशन गर्मियों और हनीमून के लिए एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल के रूप में उभरा है।

 

पौराणिक कथाओं में माउंट

  आबू इस स्थान को ‘अर्बुदरान्य’ भी कहा जाता है, जिसका नाम नाग देवता ‘अर्बुदा’ के नाम पर पड़ा। किवदंतियों के अनुसार भगवान शिव के पवित्र बैल नंदी की रक्षा करने के लिए नागदेवता इस पहाड़ी के नीचे आए थे। अर्बुदारन्य का नाम बाद में बदलकर ‘अबू पर्वत’ या ‘माउंट आबू’ कर दिया गया। ऐतिहासिक रूप से यह स्थान गुर्जरों या गुज्जरों द्वारा बसाया गया और अर्बुदा पर्वत के साथ इनका जुड़ाव इस क्षेत्र में पाए जाने वाले शास्त्रों और शिलालेखों में दिखता है।

 माउंट आबू में पर्यटन स्थलों का भ्रमण 

 इस स्थान के प्रमुख पर्यटन स्थल नक्की झील, सनसेट पॉइंट, टोड रॉक, अबू रोड का शहर, गुरू शिखर चोटी और माउंट आबू वन्य जीवन अभयारण्य हैं। माउंट आबू में धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के अनेक स्मारक हैं जिनमें मुख्य रूप से दिलवारा के जैन मंदिर, आधार देवी मंदिर, दूध बावडी, श्री रघुनाथ जी मंदिर और अचलगढ़ किला आते हैं। 

माउंट आबू पहुँचना

  माउंट आबू रास्ते, रेल और वायुमार्ग द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। वायुमार्ग द्वारा यहाँ पहुँचने के लिए पर्यटक उदयपुर की उड़ान ले सकते हैं जो यहाँ से लगभग 185 किमी. की दूरी पर है। यहाँ वर्ष भर मौसम खुशनुमा रहता है हालांकि इस स्थान की सैर के लिए गर्मियों का मौसम सबसे अच्छा है।
  

कैसे पहुंचें माउंट आबू

 सड़क मार्ग

 नियमित बस और टैक्सी सेवा द्वारा इस शहर तक रास्ते द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है। कई प्रमुख भारतीय शहरों जैसे नई दिल्ली, मुंबई, जयपुर, उदयपुर और अहमदाबाद से माउंट आबू के लिए बस सेवाएँ उपलब्ध हैं। यात्रियों की भीड़ के अनुसार बसों की आवृत्ति दैनिक से साप्ताहिक होती है। बस का किराया बस की सुविधाओं और आराम पर निर्भर करता है।

 ट्रेन द्वारा

 माउंट आबू तक रेल द्वारा पहुँचा जा सकता है जहाँ निकटतम रेलवे स्टेशन अबू रोड़ शहर है जो 15 किमी. की दूरी पर स्थित है। अबू रोड़ स्टेशन दो बड़े महानगरों मुंबई और नई दिल्ली को जोड़ने वाले मुख्य रेल मार्ग पर स्थित है। यहाँ से कई मुख्य शहरों जैसे बेंगलुरू, हैदराबाद, नई दिल्ली, चेन्नई, अहमदाबाद, पुणे, मुंबई, जयपुर, देहरादून और त्रिवेंद्रम के लिए रेल सेवा उपलब्ध है।

 एयर द्वारा

 हवाई मार्ग द्वारा माउंट आबू पहुँचने के लिए आप उदयपुर की उड़ान ले सकते हैं जो माउंट आबू का निकटतम हवाई अड्डा है। उदयपुर हवाई अड्डा इस शहर से 185 किमी. की दूरी पर स्थित है। एक अन्य उपलब्ध विकल्प यह है कि आप गुजरात के अहमदाबाद की उड़ान ले सकते हैं। गुजरात की इस राजधानी से सभी प्रमुख भारतीय शहरों के लिए उड़ाने उपलब्ध हैं। गुजरात का हवाई अड्डा माउंट आबू से 221 किमी. की दूरी पर स्थित है और यहाँ से हिल स्टेशन के लिए परिवहन सुविधा आसानी से उपलब्ध है। 

माउंट आबू इसलिए है प्रसिद्ध 

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 १. गुरू शिखर चोटी, माउंट आबू

 


गुरू शिखर चोटी अरावली क्षेत्र की सबसे ऊँची चोटी है जो माउंट आबू से 15 किमी. की दूरी पर स्थित है। यह 1722 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। पर्यटक इस भव्य शानदार चोटी पर पैदल ही जाते हैं। यात्री पहाड़ की चोटी से अरावली क्षेत्र का पूरा दृश्य देख सकते हैं।
 
 गुरू दत्तात्रय मंदिर एक प्राचीन मंदिर है जो इस पर्वत की चोटी पर स्थित है।यह मंदिर भगवान दत्तात्रय को समर्पित है जो दिव्य त्रिमूर्ति भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव के अवतार माने जाते हैं। इस पर्वत पर स्थित अन्य मंदिर शिव मंदिर, मीरा मंदिर और चामुंडी मंदिर है। इन मंदिरों के अलावा यहाँ वेधशाला भी है जहाँ से खगोलीय पिंडों की भूमि आधारित अवरक्त टिप्पणियाँ की जा सकती हैं। वेधशाला फिज़िकल रिसर्च लेबोरेटरी (पीआरएल) के प्रशासन के अधीन है।

 २.सनसेट पॉइंट, माउंट आबू

 



सनसेट पॉइंट माउंट आबू का शाम के पर्यटन का प्रमुख आकर्षण है जो नक्की झील के दक्षिण पश्चिम में स्थित है। इस स्थान की पृष्ठभूमि में सुंदर पहाड़ हैं, जो देखने में सुंदर लगते हैं, विशेषत: सूर्यास्त के समय।
 
 गर्मियों के मौसम में यह स्थान पर्यटन का एक लोकप्रिय आकर्षण रहता है क्योंकि बड़ी संख्या में यात्री इस स्थान के आरामदायक ठंडे परिवेश का आनंद उठाने के लिए यहाँ आते हैं। शॉपिंग में रूचि रखने वाले लोग पास स्थित हनीमून पॉइंट पर जा सकते हैं जो अपनी शिल्पकृतियों और खाने के स्थानों के लिए प्रसिद्द है। इस स्थान से पर्यटक यादगार के रूप में छोटी लकड़ी की मूर्तियाँ, आभूषण और खिलौने खरीद सकते हैं।

 ३.दिलवारा जैन मंदिर, माउंट आबू

 



  11 वीं और 13वीं शताब्दी में बने हुए दिलवारा जैन मंदिर माउंट आबू के ऐसे पर्यटन स्थल हैं, पर्यटकों को जिनका भ्रमण अवश्य करना चाहिए। ये मंदिर सफेद संगमरमर की नक्काशियों से बने हैं। ये मंदिर पाँच नाज़ुक नक्काशियों वाले मंदिरों से मिलकर बने हैं और संपूर्ण राजस्थान में ये सबसे सुंदर माने जाते हैं।
 
 सभी पाँच मंदिर एक दूसरे से भिन्न हैं जिनमें से प्रत्येक का नाम राजस्थान के एक गाँव के नाम पर रखा गया है। ये पाँच मंदिर हैं विमल वसाही मंदिर, लुना वसाही मंदिर, पीथालहर मंदिर, खरतार वसाही मंदिर और श्री महावीर स्वामी मंदिर। बड़ी संख्या में जैन भक्त यहाँ तीर्थंकरों (संत) के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने यहाँ आते हैं।
 
 इन मंदिरों की स्थापत्यकला की उत्कृष्टता का गवाह बनने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक यहाँ आते हैं। इन मंदिरों के बारे में अधिक जानने के लिए आप किराए पर गाइड (मार्गदर्शक) की सेवा भी ले सकते हैं। दिलवारा के जैन मंदिर माउंट आबू से ढाई किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं और यहाँ तक रास्ते द्वारा पहुँचा जा सकता है।
 

४. नक्की झील, माउंट आबू


नक्की झील माउंट आबू का एक अन्य लोकप्रिय पर्यटन स्थल है जहाँ अनेक पर्यटक और स्थानीय लोग आते हैं। यह 1200 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है और भारत की एकमात्र कृत्रिम झील है। यह एक सुंदर और शांत स्थान है जिसकी पृष्ठभूमि में सुरम्य पहाडियाँ हैं। इस झील का नाम एक किवदंती के आधार पर पड़ा जिसके अनुसार इस झील की खुदाई देवों ने अपने नाखूनों से की थी जिससे वे दुष्ट राक्षसों से अपनी रक्षा कर सकें। एक अन्य किवदंती के अनुसार इस झील की खुदाई दिलवारा जैन मंदिर के एक मूर्तिकार रसिया बालम ने एक रात में की थी।
 

पर्यटक गाँधी घाट का भ्रमण भी कर सकते हैं जो महात्मा गाँधी की याद में बनाया गया था। 12 फरवरी 1948 को उनकी राख इस झील में विसर्जित की गई। इस झील के पास कई चट्टानी पर्वत हैं जो पर्यटकों और साहसिक कार्यों के प्रेमियों को रॉक क्लाइम्बिंग का अवसर प्रदान करते हैं। इसके अलावा आप यहाँ बोटिंग(नाव की सवारी) भी कर सकते हैं और इस झील के शांत और स्थिर पानी का आनंद उठा सकते हैं।

 ५.टोड रॉक, माउंट आबू

 



टोड रॉक माउंट आबू का एक जाना माना पर्यटन स्थल है जो नक्की झील के पास स्थित एक बड़ी चट्टान है। यह पहाड़ी शहर से मुख्य ट्रेकिंग के रास्ते पर स्थित है। इस बुलंद चट्टान का आकार मेंढक से मिलता है अत: इसे टोड रॉक कहा जाता है।
 
 इसके अलावा इस टोड रॉक के आसपास कई चट्टानी संरचनाएँ हैं जिनमें प्रमुख रूप से कैमल रॉक, नंदी रॉक और नून रॉक आते हैं। ये चट्टानें ट्रेकिंग के लिए उपयुक्त है। इस चट्टानों के ऊपर पहुँचने पर ट्रैकर्स (पदयात्री) नक्की झील और उसके परिवेश का सुंदर दृश्य देख सकते हैं।

६. माउंट आबू वन्य जीवन अभयारण्य, माउंट आबू

 


इस हिल स्टेशन की सैर के लिए आने वाले पर्यटकों के लिए माउंट आबू वन्य जीवन अभयारण्य एक अवश्य देखने योग्य स्थान है। यह अभ्यारण्य अरावली पर्वत श्रेणियों में स्थित है और यह 19 किमी. लंबे और 5 – 8 किमी. चौड़े पठार पर स्थित है। 
 
1960 में इसे वन्य जीवन अभ्यारण्य घोषित किया गया। यहाँ पर्यटक विभिन्न प्रकार की वनस्पतियाँ और जीवजन्तु देख सकते हैं जो प्रकृति प्रेमियों और वन्य जीवन उत्साहियों के लिए एक दावत के समान है। माउंट आबू वन्य जीवन अभयारण्य में फूलों की विविधता पाई जाती है। यहाँ लगभग 820 प्रजाति के पौधे पाए जाते हैं। यहाँ ऑर्किड फूलों की बड़ी विविधता भी पाई जाती है।
 
 हरियाली से घिरे होने के अलावा यह अभयारण्य अपने जीवजन्तुओं के लिए भी प्रसिद्द है। वन्यजीव प्रेमी यहाँ अनेक अद्वितीय और दुर्लभ प्रजातियों के जानवर देख सकते हैं। पहले इन पहाड़ों पर शेर और बाघ मिलते थे परंतु अब यहाँ केवल तेंदुएं मिलते हैं। फिर भी यहाँ अन्य जंगली प्रजातियां जैसे सांबर डियर, जंगली सुअर, भालू, सियार, भारतीय लोमड़ी, भेड़िया, हायना, छोटी भारतीय सीविट और जंगली बिल्ली पाए जाते हैं।

 ७. मोगली लैंड, माउंट आबू


अभी कुछ समय पहले ही माउंट आबू में आरन गाँव से 800 मीटर दूर पुरानी सभ्यता के अवशेष मिले हैं। वन अधिकारियों के एक समूह को इस स्थान की खुदाई के दौरान प्राचीन बर्तन और ईंटें मिली हैं। ऐसा अनुमान लगाया गया है कि ये अवशेष 1000 वर्ष से भी ज़्यादा पुराने हैं जो उस समय के यात्रियों के आराम करने की जगह थी। 
 
 अब इस स्थान को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया है। इस स्थान को मोगली लैंड कहा जाता है क्योंकि जंगल का यह स्थान रुडयार्ड किपलिंग की प्रसिद्द पुस्तक ‘द जंगल बुक’ के चित्र से मिलता जुलता है। इस पुस्तक में प्रमुख किरदार ‘मोगली’ था।

 ८.अबू रोड़, माउंट आबू



अबू रोड़, राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित एक शहर है। यह माउंट आबू के दक्षिण पूर्व में स्थित है। पहले यह शहर खराड़ी के नाम से जाना जाता था। अबू रोड़ सिरोही जिले का सबसे बड़ा शहर है जो समुद्र सतह से औसतन 263 मीटर की ऊँचाई पर बनास नदी के किनारे स्थित है। अबू रोड़ के कुछ प्रमुख पर्यटन आकर्षण गणेश मंदिर, ब्रह्म कुमारी आश्रम, चन्द्रावती मंदिर और भद्रकाली मंदिर हैं।

 ९.अंचलगढ़, माउंट आबू


अंचलगढ़ राजमाची में स्थित एक छोटा गाँव है। यह अंचलगढ़ किले के लिए प्रसिद्द है जो माउंट आबू से 11 किमी. की दूरी पर स्थित है। वे पर्यटक जो इस हिल स्टेशन की सैर के लिए आते हैं वे अंचलगढ़ किले के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के कारण यहाँ अवश्य आते हैं। मूल रूप से परमार वंश के राजाओं द्वारा बनाए गए इस किले का पुनर्निर्माण ईसा पश्चात 1452 में मेवाड़ के राजा राणा कुम्भा द्वारा किया गया।. 
 
अंचलगढ़ किले के परिसर में अंचलेश्वर महादेव मंदिर स्थित है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। ऐसा विश्वास है कि इस मंदिर में स्थित चट्टान पर भगवान के पदचिन्ह हैं। इस मंदिर में भगवान शिव के बैल नंदी की पीतल की बड़ी मूर्ति और पत्थर की भैसों की तीन बड़ी मूर्तियाँ भी स्थित है। इस किले में कई जैन मंदिर भी हैं जो इस स्थान के धार्मिक महत्व को बढ़ाते हैं। मंदिर के दो मुख्य प्रवेश द्वार हैं एक हनुमानपोल और दूसरा चंपापोल। अंचलगढ़ किले का निर्माण शत्रुओं से इस क्षेत्र से रक्षा करने के लिए बनाया गया था जिससे निवासी सुरक्षित रह सकें।

१०. शंकर मठ, माउंट आबू



शंकर मठ एक भव्य पत्थर से बना हुआ शिवलिंग है जो भगवान शिव को समर्पित है। इसका निर्माण लगभग 25 वर्ष पूर्व हुआ था। यह स्थान माउंट आबू के मुख्य बाज़ार के पास स्थित है। शंकर मठ माउंट आबू का प्रसिद्द धार्मिक आकर्षण है जिसका नेतृत्व स्वामी महेशानंदजी गिरी करते हैं।

 ११. ऋषिकेश मंदिर, माउंट आबू


ऋषिकेश मंदिर एक प्राचीन मंदिर है जो अर्धचंद्राकार पहाड़ी पर स्थित है। इस मंदिर का निर्माण लगभग 7000 वर्ष पूर्व राजा अमरीश ने किया था, जिसने माउंट आबू में अमरावती सभ्यता की स्थापना की। इस मंदिर का नाम राजा अमरीश के इष्ट देवता भगवान ऋषिकेश के नाम पर पड़ा। किवदंती के अनुसार राजा 100 अश्वमेघ यज्ञ करने में सफल हुआ जिससे भगवान इंद्र क्रोधित हो गए और उन्होंने राजा पर आक्रमण कर दिया। हालांकि भगवान ऋषिकेश ने राजा अमरीश को भगवान इंद्र के क्रोध से बचा लिया।

 १२.श्री रघुनाथ जी मंदिर, माउंट आबू

 

श्री रघुनाथ जी मंदिर माउंट आबू का एक महत्वपूर्ण धार्मिक आकर्षण है जो नक्की झील के किनारे स्थित है। कह जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 14 वीं शताब्दी में हिंदू पंडित श्री रामानंद ने करवाया था। भगवान विष्णु को समर्पित इस मंदिर में बड़ी संख्या में वे भक्त आते हैं जो हिंदू धर्म के वैष्णव पंथ के अनुयायी हैं।
 
 भित्ति चित्रों और जटिल नक्काशियों से सुसज्जित यह मंदिर मारवाड़ की संस्कृति और वास्तुकला की विरासत का उत्कृष्ट उदाहरण है। इस मंदिर का मुख्य आकर्षण श्री रघुनाथ जी की भव्य मूर्ति है। भक्तों के अलावा यहाँ प्रतिदिन बड़ी संख्या में पर्यटक भी आते हैं। नक्की झील का भ्रमण करने के लिए आने वाले पर्यटक श्री रघुनाथ जी मंदिर का भ्रमण भी करते हैं ताकि वे स्थापत्य प्रतिभा के गवाह बन सकें।

 होटेल्स 

१. Hotel Hillock,माउंट आबू

 


अवलोकन विवरण

 The property is located amidst beautiful landscaped gardens and is conveniently located close to main commercial hubs of the city. It is also located close to the main market, Nakki Lake and bus stand. The luxury property welcomes guests in the spacious lobby with its dancing fountains whispering cascades & soft music. The impeccable amenities and hospitality provided attracts travellers all around the globe and makes it an ideal holiday getaway for both business and leisure travellers

 सुविधाएं

 The property offers numerous facilities to the guests to make their stay more pleasant and memorable. Some of the hotel facilities offered to the guests are: Doctor on Call Travel Desk Safe Deposit Locks Laundry Service Car Rentals Postal and courier services Massage Parlor Swimming Pool Round the clock room service Apart from these general amenities, the property has excellent dining options where guests can delight their taste buds by enjoying the meals served at the restaurant. One can dine at Mayur Restaurant which offers a wide array of delectable cuisines around the world to suit their buds.

 २.Rising Sun Retreat

 

सुविधाएं

 The luxury property offers exclusive facilities and conveniences to the travelers to make their stay more comfortable and memorable. Some of the facilities offered to the guests are: 
 Laundry service
 Room service from 7 am to 10 pm
 Doctor on call 
Travel assistance for local sightseeing by cab, bus or by two wheeler Car Parking Traditional Rajasthani cuisine

 


 

माउंट आबू फोटो

 














 
 


 


 

Monday, 4 January 2021

चेरापूँजी पर्यटन – भारत की बारिश घाटी (Cherrapunji-India)

मित्रों आज मे लाया हु एक ऐसा पर्यटन स्थल जहा आपको सबकुछ मिलेगा जहा जंगल है। हिल स्टेशन है।और यह सहासिक टूर कर सकते हो। तो आईए जानते है असे एक स्थल के बारे मै।
  Friends, today I have brought such a tourist place where you will get everything where the forest is.  Hill station. And you can do this tour.  So let's know about such a place.

मेघालय को चेरापूँजी (जिसे स्थानीय रूप से सोहरा के नाम से लोकप्रिय है) के कारण पूरे विश्व में जाना जाता है। जब चेरापूँजी पृथ्वी पर सबसे नम स्थान होता है तो बहुत ही सम्मोहक होता है। लहरदार पहाड़, कई झरने, बांग्लादेश के मैदानों का पूरा दृश्य और स्थानीय जनजातीय जीवनशैली की एक झलक चेरापूँजी की आपकी यात्रा को यादगार बनाते हैं।
Meghalaya is known all over the world due to Cherrapunji (popularly known as Sohra).  When Cherrapunji is the wettest place on earth, it is very compelling.  The undulating mountains, many waterfalls, full view of the plains of Bangladesh and a glimpse of the local tribal lifestyle make your trip to Cherrapunji memorable.

चेरा के दलदल वाले इलाके – चेरापूँजी तथा इसके आस-पास के पर्यटक स्थल        (Chera's swampy area - Cherrapunji and its nearby tourist places )

   चूँकि चेरापूँजी (जिसका शाब्दिक अर्थ है सन्तरों का स्थान) में वर्षभर भारी बारिश होती है इसलिये यहाँ की मिट्टी हल्की हो गई है जिसके कारण खेती लगभग असम्भव है। ऐसा इसलिये है क्योंकि लगातार बारिश और वर्षों के वन कटाव के कारण मिट्टी की ऊपरी परत कमजोर हो जाती है और अगली बारिश में वह परत बह जाती है।
Since Cherrapunji (literally meaning place of oranges) receives heavy rainfall throughout the year, the soil here has become light due to which cultivation is almost impossible.  This is because the top layer of soil becomes weak due to continuous rains and years of forest erosion and that layer gets washed away in the next rain.

  लेकिन लगातार बारिश होने के कारण ही क्षेत्र में कई मन्त्रमुग्ध कर देने वाले पर्यटक स्थल हैं। मास्मई, नोहकालीकई, डैन थ्लेन जैसे झरने ऊचें पहाड़ो से सँकरे गढ्ढों में गिर कर एक अविस्मरणीय चित्र प्रस्तुत करते हैं। सुन्दर नोहकालीकई झरने के बारे में यह बताना आवश्यक है कि यह देश के सबसे बड़े झरनों में से एक है। चेरापूँजी पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सा-इ-मीका पार्क में भरपूर मनोरंजक गतिविधियाँ उपलब्ध कराई गई हैं।

But due to continuous rains, there are many enchanting tourist places in the area.  Waterfalls like Masmai, Nohkalikai, Dan Thlen fall into high pits from high mountains and offer an unforgettable picture.  It is necessary to mention about the beautiful Nohkalikai waterfall that it is one of the largest waterfalls in the country.  In order to promote Cherrapunji tourism, recreational activities have been provided in Sa-e-Mica Park.

चेरापूँजी – मनमोहक दृश्यों के बीच  ( Cherrapunji - Between Enchanting Scenes)

   हवादार सड़कों पर शिलाँग से सँकरे तथा तंगघाटी वाले रास्तों से गुजरते हुये और कुहरे से निकलते हुये तथा अपने चेहरे पर बादलों वाली को बयार को महसूस करते हुये आप खूबसूरत चेरापूँजी तक पहुँच सकते हैं। प्रकृति ने सोहरा को भरपूर सँवारा है जिसके कारण यह एक पवित्र पर्यटक आकर्षण बन गया है। चेरापूँजी का पर्यटन केवल सामान्य इधर-उधर घूमना नहीं है बल्कि बहुत कुछ साहसिक पर्यटन है। सामान्य पर्यटक स्थानों से लेकर लीक से हटकर पर्यटक स्थानों तक, सभी चेरापूँजी में पाये जाते हैं।
On windy roads, you can reach the beautiful Cherrapunji by passing through Shillong and passing through narrow streets and passing through the mist and feeling the breeze with clouds on your face.  Nature has made Sohra so beautiful due to which it has become a sacred tourist attraction.  The tourism of Cherrapunji is not just a normal walk here and there but a lot of adventure tourism.  From common tourist places to offbeat tourist places, all are found in Cherrapunji. 

    चेरापूँजी मेघालय के पूर्वी खासी पहाड़ी जिले का एक कस्बा है। समुद्रतल से 1484 मीटर की ऊँचाई पर स्थित सोहरा एक पठार पर बसा है जहाँ से बाँग्लादेश का असीमित लगने वाला मैदानी भाग दिखता है। सबसे भरोसेमन्द आँकड़ों के अनुसार चेरापूँजी में 463.66 इंच प्रति वर्ष की दर से वर्षा होती है और यह स्थान इस ग्रह के सबसे नम स्थानों में से एक है।
Cherrapunji is a town in the East Khasi Hills district of Meghalaya.  Situated at an altitude of 1484 meters above sea level, Sohra is situated on a plateau overlooking the seemingly unlimited plains of Bangladesh.  According to the most reliable statistics, Cherrapunji receives rainfall at the rate of 463.66 inches per year and this place is one of the wettest places on the planet.

चेरापूँजी का इतिहास - अंग्रेजों का आगमन और समुदाय में बदलाव  (History of Cherrapunji - Arrival of British and change in community)

 अंग्रेजों के खासी पहाड़ियों पर आने से इसे क्षेत्र की आजकल की कार्यशैली बहुत प्रभावित हुई। ईस्ट इण्डिया कम्पनी के राजनीतिक दूत के रूप में डेविड स्कॉट 19वीं सदी की शुरुआत में उस समय के पूर्वी बंगाल से होते हुये चेरापूँजी आये। स्कॉट के समय में चेरापूँजी चेरास्टेशन के रूप में जाना जाने लगा और उन्होंने इसे खासी और जैन्तिया पहाड़ियों का आधिकारिक मुख्यालय बनाया।
The current style of functioning of the region was greatly affected by the arrival of the British on the Khasi Hills.  As the political envoy of the East India Company, David Scott arrived in Cherrapunji in the early 19th century via East Bengal.  In Scott's time Cherrapunji came to be known as Cherastation and they made it the official headquarters of the Khasi and Jaintia hills.
  इसके पश्चात यह असम की राजधानी भी रहा और बाद में अंग्रेजों ने शिलाँग को राजधानी बनाया। वेल्श मिशन के आने के बाद सोहरा में खास बदलाव हुये। विलियम कैरे की अगुवाई में विल्स मिशन के अन्तर्गत चेरापूँजी ने काफी तरक्की की। थॉमस जोन्स नाम के एक और समाज सेवी ने खासी तथा जैन्तिया पहाड़ियों के जनजातीय समूहों में खेती की तकनीक आदि को विकसित किया। वास्तव में पूर्वोत्तर भारत का पहला गिरजाघर चेरापूँजी में सन् 1820 में बनाया गया था।
After this, it also remained the capital of Assam and later the British made Shillong the capital.  After the arrival of the Welsh Mission, special changes took place in Sohra.  Cherrapunji made considerable progress under the Wills Mission led by William Carrey.  Another society servant named Thomas Jones developed farming techniques etc. in tribal groups of Khasi and Jaintia hills.  In fact, the first church in northeast India was built in Cherrapunji in 1820.

   हलाँकि समाजसेवी संगठन जनजातीय समुदाय के विकास का कार्य लगातार करते रहे लेकिन अंग्रेजों ने चेरा के भौगोलिक लाभ को जल्द ही भाँप लिया। एक तो सिल्हट मैदानी भाग से नजदीकी तथा दूसरी ओर असम की पहाड़ियाँ, इसे एक आदर्श प्रशासनिक केन्द्र बनाती थीं। सुहावना मौसम परिस्थितियों को और भी बेहतर बनाता था।
Although the social organizations continued to work for the development of the tribal community, the British soon realized the geographical benefits of Chera.  On one hand, the hills close to the Sylhet plains and the hills of Assam on the other, made it an ideal administrative center.  The pleasant weather made the conditions even better.

चेरापूँजी कैसे पहुँचें   (How to reach Cherrapunji)

  चेरापूँजी शिलाँग से 55 किमी की दूरी पर है और इस पर्यटक स्थल तक पहुँचने में दो घण्टे का समय लगता है। शिलाँग तथा चेरापूँजी के बीच सड़क परिवहन बहुत अच्छा है और व्यक्तिगत वाहनों के साथ-साथ सरकारी यातायात के साघन हमेशा उपलब्ध रहते हैं।
Cherrapunji is 55 km from Shillong and it takes two hours to reach this tourist place.  Road transport between Shillong and Cherrapunji is very good and compact with individual vehicles as well as government traffic is always available.

चेरापूँजी का मौसम (Cherrapunji Weather)

  चेरापूँजी में वार्षिक रूप से 11931.7 मिमी वर्षा दर्ज की जाती है। सोहरा में पर्यटकों को लगातार बारिश का सामना करना पड़ता है क्योंकि यहाँ किसी भी समय भारी वर्षा होने की सम्भावना रहती है। गर्मियों के दौरान जब बारिश कम होती है तो मौसम बहुत ही चिपचिपा और गर्म हो जाता है।

Cherrapunji receives 11931.7 mm of rainfall annually.  Tourists have to face frequent rains in Sohra as there is a possibility of heavy rainfall at any time.  During the summer when the rainfall is less, the weather becomes very sticky and hot.

चेरापूँजी इसलिए है प्रसिद्ध (Cherrapunji is Famous for)

  •    wildlife


 

 

 

  • Adventurer


 

 

 

  • Hill  station


 

 

 

 

 

१.   मॉस्मई झरना, चेरापूँजी (Mawsmai Falls, Cherrapunji)


 

 


   मॉस्मई झरना मेघालय के शानदार झरनों में से एक हैं। यह मॉस्मई गाँव के बहुत पास में स्थित है और चेरापूंजी के रास्ते में पड़ता है। मॉस्मई झरने को स्थानीय रूप से नोहस्न्गिथियाँग झरने के रूप में जाना जाता है और पानी के 315 मीटर की ऊँचाई के गिरने के साथ यह भारत के सबसे ऊँचे झरनों में चौथे स्थान पर है।

  इस झरने को लोकप्रिय रूप से सात बहनों वाले झरने के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि खतरनाक खड़ी चट्टान से गिरते समय सात अलग झरनों में बँट जाता है। एक तेज धूप वाले चमकीले दिन में यह झरना अत्यन्त सुरम्य होता है क्योंकि यह सूर्य की किरणों को परावर्तित करने के साथ-साथ विभिन्न दिशाओं में चटकीले रंगों को भी बिखेरता है। 

  हालाँकि बदली के दिनों में भी झरना के आसपास आप अपने पैरों तले बादलों के टुकड़ों को गुजरते हुये महसूस कर सकते हैं जो अपने आप में एक चमत्कार है। यहाँ तक तक पहुँचने के लिये शिलाँग से पर्यटक टैक्सी या बस लेना सबसे बेहतर तरीका है।
  Mawsmai Falls are one of the magnificent waterfalls of Meghalaya.  It is located very close to the village of Mawsmai and lies on the way to Cherrapunji.  The Mawsmai Falls is locally known as the Nohsangithianong Falls and is ranked fourth among the tallest waterfalls in India with a water fall of 315 meters.

 This waterfall is also popularly known as the Seven Sisters waterfall as it falls into seven separate springs while falling from a dangerous steep cliff.  On a bright sunny day, this waterfall is very picturesque as it reflects bright sunlight in different directions while reflecting the rays of the sun.

 However, even on cloudy days, around the waterfall, you can feel the clouds passing under your feet, which is a miracle in itself.  The best way to reach here is to take a tourist taxi or bus from Shillong.

 २.   डैन-थ्लेन झरना, चेरापूँजी (Dan-Thlen Waterfall, Cherrapunji)



   चेरापूँजी के निकट डैन-थ्लेन झरना एक और शानदार झरना है। इसका नाम क्षेत्र में रहने वाले थ्लेन या अजगर के नाम पर पड़ा है। लोककथाओं के अनुसार गाँव वासियों को वह अजगर मिल गया और उन्होंने उसे नष्ट कर उसके दहशत के साम्राज्य को समाप्त किया। बाद में उसके माँस की दावत उड़ाई गई। जहाँ पर उस साँप का वध किया गया था वहीं पर डैन-थ्लेन झरना गिरता है। इसी लोककथा के कारण ही इस झरने की लोकप्रियता और भी बढ़ जाती है।

  पूरे विश्व से पर्यटक इस सुन्दर झरने और पास के प्राकृतिक शिलाओं को देखने के लिये आते हैं जिसपर भ्रष्टाचार, लालाच और बुराई के प्रतीक थ्लेन के साथ युद्ध के चिन्ह पाये जाते हैं। डैन-थ्लेन चेरापूँजी के रास्ते पर पाँच किमी की दूरी पर स्थित है और यहाँ तक पहुँचने के लिये शिलाँग से किराये की पर्यटक बस अथवा टैक्सी लेना सबसे बेहतर होता है।

Another spectacular waterfall is the Dan-Thlen waterfall near Cherrapunji.  It is named after the thlen or dragon living in the area.  According to folklore, the villagers found the dragon and destroyed it and ended the empire of its horror.  Later his meat feast was flown.  Where the snake was slaughtered is where the Dan-Thlen waterfall falls.  Due to this folklore, the popularity of this waterfall increases even more.

 Tourists from all over the world come to see this beautiful waterfall and the nearby natural rocks on which are found signs of war with thlen, symbol of corruption, redoubt and evil.  Dan-Thlen is located at a distance of five km on the way to Cherrapunji and it is best to take a hired tourist bus or taxi from Shillong.

३.   सा-इ-मीका पार्क, चेरापूँजी (Sa-e-Mica Park, Cherrapunji)


  सा-इ-मीका पार्क चेरापूँजी का अद्भुत पार्क है जहाँ पर मनोरंजन के साथ-साथ पर्यटकों के लिये शैक्षिक ज्ञानवर्धन भी होता है। यहाँ पर वॉलीबॉल कोर्ट, बास्केटबॉल कोर्ट, स्केटिंग रिंग, बैडमिन्टन कोर्ट जैसे कई खेलों की सुविधाओं के साथ-साथ बच्चों के लिये खेलने का स्थान और झूले हैं।
 
   गर्मियों के दिनों में अपने आप को ठंडा रखने के लिये यहाँ बच्चों के लिये तरणताल भी है। पार्क के अन्दर रुकने की सुविधा भी उपलब्ध है जिन्हें पारम्परिक खासी शैली में बनाया गया है। पार्क में चारों तरफ पिकनिक वाली झोपड़ियाँ भी हैं जिनमें लोग स्वयं खाना बनाकर अपने परिवार तथा मित्रों के साथ बैठकर उसका आनन्द ले सकते हैं।
 
 यहाँ पर एक कॉन्फरेन्स हॉल भी है जहाँ पर लोग शहर की आपा-धापी से दूर शाँत वातावरण में बैठकों का आयोजन कर सकते हैं। शिलाँग से किराये की टैक्सी अथवा बस द्वारा आप आसानी से सा-इ-मीका पार्क तक पहुँच सकते हैं और यात्रा में पड़ने वाले हरे-भरे पहाड़ो के सुरम्य दृश्यों का आनन्द ले सकते हैं।

Sa-e-Mica Park is a wonderful park of Cherrapunji where there is entertainment as well as educational enlightenment for the tourists.  It has facilities for many sports such as volleyball court, basketball court, skating ring, badminton court as well as a place for children to play and swing.

 There is also a swimming pool for children to keep themselves cool during the summer days.  Stay facilities are also available inside the park, which have been built in the traditional Khasi style.  There are also picnic huts all around the park in which people can cook themselves and enjoy sitting with their family and friends.

 There is also a conference hall where people can organize meetings in a quiet environment away from the city’s chaos.  From Shillong you can easily reach Sa-i-Mica Park by a rental taxi or bus and enjoy the picturesque views of the lush green hills of the journey.

४. मॉम्लुह गुफायें, चेरापूँजी (Momluh Caves, Cherrapunji)



   मॉम्लुह गुफायें या लोकप्रिय रूप से प्रसिद्ध क्रेम मॉम्लुह गुफायें भारतीय प्रायद्वीप की चौथी सबसे लम्बी गुफायें हैं। इनकी लम्बाई शानदार 4503 मीटर है और यह क्षेत्र का अग्रणी पर्यटक आकर्षण है। इस गुफा में कई प्रवेश द्वार हैं जिनमें से कई काफी खतरनाक भी हैँ।

   इसलिये प्रवेश के लिये सर्वोत्तम प्रवेश द्वार ऊँचा वाला माना जाता है जो सतह से 10 फीट ऊँचा है और लम लॉबाह के पश्चिमी किनारे पर है। गुफा के अन्दर एक सुन्दर तरणताल है जो गुफा के अन्दर प्रवेश करने वाली पाँच नदियों के मिलने से बना है।

   यहाँ पर यह जान लेना अत्यन्त आवश्यक है कि मॉस्मई गुफाओं के विपरीत मॉम्लुह गुफायें बहुत ही खतरनाक (निःसन्देह साहसिक) हैं और इसलिये इनमें प्रवेश करने से पूर्व विशेष सतर्कता और तैयारी की आवश्यकता होती है। शिलाँग से पर्यटक टैक्सी लेकर मॉम्लुह गुफाओं तक पहुँचना सबसे बेहतर और सुविधाजनक तरीका है।
Momluh Caves or popularly known crème Momluh Caves are the fourth longest caves in the Indian Peninsula.  Their length is a magnificent 4503 meters and is the leading tourist attraction of the region.  This cave has many entrances, many of which are quite dangerous.

 Therefore the best entrance to the entrance is considered to be high which is 10 feet above the surface and is on the western side of Lum Lobah.  There is a beautiful swimming pool inside the cave which is made up of the joining of five rivers that enter the cave.

 It is important to know here that unlike the Mawsmai caves, the Mamluh caves are very dangerous (adventurous adventure) and hence special vigilance and preparation is required before entering them.  The best and most convenient way to reach the Momluh Caves is by taking a tourist taxi from Shillong.

 5.ईको पार्क, चेरापूँजी (Eco Park, Cherrapunji)



   ईको पार्क उन कई सुन्दर पार्कों में से एक है जहाँ चेरापूँजी आने पर घूमने जाया जा सकता है। इसका डिजाइन मेघालय सरकार द्वारा एक ऊँचे पठार पर तैयार किया गया था जिससे कि पर्यटक सुन्दर हरे पहाड़ों, सोहरा की घाटियों और यहाँ से निकलने वाले झरने का आनन्द ले सकें। आप इस पार्क में विभिन्न प्रकार के ऑर्किड देख सकते हैं जिसका श्रेय शिलाँग के कृषि-बागवानी संघ को जाता है।
 
   ईको पार्क के किनारों पर प्राकृतिक सुन्दरता अचम्भित करने वाली है। यहाँ से बाँग्लादेश के सिल्हट मैदानी इलाकों का दृश्य देखा जा सकता है। हलाँकि यदि बादल छायें हों तो पार्क की भरपूर सुन्दरता का आनन्द लेने के लिये पर्याप्त प्रकाश की कमी खलेगी। शिलाँग से ईको पार्क तक पहुँचने के लिये सबसे बेहतर तरीका मेघालय पर्यटन विभाग द्वारा उपलब्ध किराये की टैक्सियाँ या बसें हैं।
Eco Park is one of the many beautiful parks that can be visited when visiting Cherrapunji.  Its design was designed by the Government of Meghalaya on a high plateau so that tourists can enjoy the beautiful green mountains, the Sohra valleys and the waterfalls that emerge from here.  You can see various types of orchids in this park, the credit of which goes to the Agricultural-Horticultural Association of Shillong.

 The natural beauty on the edges of Eco Park is astonishing.  A view of the Sylhet plains of Bangladesh can be seen from here.  However, if there are clouds, then there will be a lack of sufficient light to enjoy the beautiful beauty of the park.  The best way to reach Echo Park from Shillong is by rental taxis or buses available by the Meghalaya Tourism Department.
 

चेरापूँजी फोट
















 

 

 

 

 

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